Before Chandranath Rath, Suvendu Adhikari Lost 3 Aides In 13 Years

चंद्रनाथ रथ से पहले, सुवेंदु अधिकारी ने 13 साल में 3 सहयोगियों को खो दिया

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की उत्तर 24 परगना में कल रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना सुवेंदु अधिकारी के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, जो हाल ही में तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए थे। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब सुवेंदु अधिकारी के सहयोगी की हत्या हुई हो। पिछले 13 सालों में, उन्होंने तीन अन्य सहयोगियों को खो दिया है, जो राजनीतिक हिंसा की शिकार हुए थे।

सुवेंदु अधिकारी के सहयोगियों की हत्या का इतिहास

सुवेंदु अधिकारी के सहयोगियों की हत्या का इतिहास 2009 में शुरू हुआ, जब उनके करीबी सहयोगी प्रसेनजीत दास की हत्या कर दी गई थी। दास तृणमूल कांग्रेस के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे और सुवेंदु अधिकारी के साथ मिलकर पार्टी के लिए काम करते थे। उनकी हत्या के बाद, सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व से अपनी नाराजगी व्यक्त की थी और मांग की थी कि दास के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।

2014 में हुई दूसरी हत्या

2014 में, सुवेंदु अधिकारी के एक अन्य सहयोगी काजल दास की हत्या कर दी गई थी। दास तृणमूल कांग्रेस के एक युवा नेता थे और सुवेंदु अधिकारी के साथ मिलकर पार्टी के लिए काम करते थे। उनकी हत्या के बाद, सुवेंदु अधिकारी ने फिर से तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व से अपनी नाराजगी व्यक्त की थी और मांग की थी कि दास के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।

2018 में हुई तीसरी हत्या

2018 में, सुवेंदु अधिकारी के एक अन्य सहयोगी तपन कुंडु की हत्या कर दी गई थी। कुंडु तृणमूल कांग्रेस के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे और सुवेंदु अधिकारी के साथ मिलकर पार्टी के लिए काम करते थे। उनकी हत्या के बाद, सुवेंदु अधिकारी ने फिर से तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व से अपनी नाराजगी व्यक्त की थी और मांग की थी कि कुंडु के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।

चंद्रनाथ रथ की हत्या

अब, चंद्रनाथ रथ की हत्या ने सुवेंदु अधिकारी को एक बार फिर से झटका दिया है। रथ सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे और भाजपा में शामिल होने के बाद से उन्होंने अधिकारी के साथ मिलकर काम किया था। उनकी हत्या के बाद, सुवेंदु अधिकारी ने मांग की है कि रथ के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

राजनीतिक हिंसा का बढ़ता खतरा

सुवेंदु अधिकारी के सहयोगियों की हत्या ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। राज्य में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं और कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है। यह घटनाएं राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाती हैं और सरकार से मांग करती हैं कि वह राजनीतिक हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए।

निष्कर्ष

सुवेंदु अधिकारी के सहयोगियों की हत्या ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। यह घटनाएं राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाती हैं और सरकार से मांग करती हैं कि वह राजनीतिक हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। सुवेंदु अधिकारी को भी अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने होंगे और उन्हें राजनीतिक हिंसा के खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।


संपादक जम्पर मीडिया (Jumper Media).

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