‘This is gundagardi': Uttarakhand HC raps police for stopping man on way to Delhi protest

उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार: 'यह गुंडागर्दी है', दिल्ली जा रहे व्यक्ति को रोकने पर उठाए सवाल

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक्टिविस्ट प्रभात ध्यानी को हिरासत में लेने के लिए पुलिस की आलोचना की। अदालत ने पुलिस से पूछा कि क्या उनकी भूमिका सरकार की छवि की रक्षा करना है या लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने मामले में शामिल अधिकारी को पार्टी बनाने का निर्देश दिया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को उनके जवाब के लिए नोटिस जारी किए।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि यह गुंडागर्दी है। अदालत ने कहा कि पुलिस को यह अधिकार नहीं है कि वह नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने से रोके। अदालत ने पुलिस से पूछा कि क्या उनकी जिम्मेदारी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है या सरकार की छवि को बचाना है।

एक्टिविस्ट प्रभात ध्यानी की गिरफ्तारी

एक्टिविस्ट प्रभात ध्यानी को दिल्ली जाते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। ध्यानी दिल्ली में एक प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद उन्हें थाने ले गई और उनसे पूछताछ की। ध्यानी ने अदालत में कहा कि पुलिस ने उन्हें बिना किसी वजह के हिरासत में लिया और उन्हें उनके अधिकारों का प्रयोग करने से रोका।

अदालत का फैसला

अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया और कहा कि यह गुंडागर्दी है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने से न रोके। अदालत ने मामले में शामिल अधिकारी को पार्टी बनाने का निर्देश दिया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को उनके जवाब के लिए नोटिस जारी किए। अदालत ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि सरकार की छवि को बचाना।

पुलिस की प्रतिक्रिया

पुलिस ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि वे अदालत के निर्देशों का पालन करेंगे। पुलिस ने कहा कि वे नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करते हैं और उनकी रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है। पुलिस ने कहा कि वे भविष्य में ऐसी कार्रवाई नहीं करेंगी जो नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करती हो।

निष्कर्ष

उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने से न रोके। अदालत का फैसला यह साबित करता है कि न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए हमेशा तैयार है।


संपादक जम्पर मीडिया (Jumper Media).

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