'Imagine the pain, humiliation': SC urges Centre to allow abortion beyond 20 weeks for rape survivors

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र से अपील: बलात्कार पीड़िताओं को 20 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दें

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह बलात्कार पीड़िताओं को 20 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देने के लिए कानून में संशोधन पर विचार करे। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में समय सीमा नहीं होनी चाहिए। न्यायालय की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि बलात्कार पीड़िता के लिए यह एक जीवन भर का आघात है और इस निर्णय को पीड़िता और उसके माता-पिता पर छोड़ देना चाहिए, साथ ही एम्स द्वारा परामर्श प्रदान किया जाना चाहिए।

न्यायालय की पीठ ने कहा कि बलात्कार पीड़िता के लिए यह एक जीवन भर का आघात है

न्यायालय की पीठ ने कहा कि बलात्कार पीड़िता के लिए यह एक जीवन भर का आघात है और इस निर्णय को पीड़िता और उसके माता-पिता पर छोड़ देना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस मामले में समय सीमा नहीं होनी चाहिए और पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि यह एक जीवन भर का आघात है और पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।

एम्स द्वारा परामर्श प्रदान किया जाना चाहिए

न्यायालय की पीठ ने कहा कि एम्स द्वारा परामर्श प्रदान किया जाना चाहिए ताकि पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय दिया जा सके। अदालत ने कहा कि एम्स द्वारा परामर्श प्रदान करना एक अच्छा विकल्प होगा ताकि पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय दिया जा सके। न्यायालय ने कहा कि यह एक जीवन भर का आघात है और पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।

केंद्र सरकार से अपील

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह बलात्कार पीड़िताओं को 20 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देने के लिए कानून में संशोधन पर विचार करे। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में समय सीमा नहीं होनी चाहिए और पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि यह एक जीवन भर का आघात है और पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार से अपील एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि बलात्कार पीड़िताओं को 20 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी जा सके। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में समय सीमा नहीं होनी चाहिए और पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि यह एक जीवन भर का आघात है और पीड़िता को अपने निर्णय के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।


संपादक जम्पर मीडिया (Jumper Media).

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