Cash, gold, diamonds and flats: Suspended Shamirpet tahsildar under ACB scanner over Rs 20cr assets

कैश, गोल्ड, डायमंड और फ्लैट: शमीरपेट तहसीलदार पर एसीबी की नज़र, 20 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के जांचकर्ताओं ने राजस्व अधिकारी के खिलाफ एक नए जांच में लगभग 20 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता लगाया है, जो पहले से ही रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार हो चुकी है। चार स्थानों पर तलाशी के दौरान, अधिकारियों ने संपत्ति, कैश, गहने और बैंक जमा का खुलासा किया जो उनकी ज्ञात आय के अनुपात से बाहर थे। तहसीलदार, टी सुचारिता, को पहले मई में एक आधिकारिक अनुकूलता के लिए रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।

जांच और खुलासे

एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान, उन्हें सुचारिता के पास से लगभग 20 करोड़ रुपये की संपत्ति मिली है, जिसमें कैश, गोल्ड, डायमंड और फ्लैट शामिल हैं। यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय के अनुपात से बाहर है और यह संदेह पैदा करती है कि यह संपत्ति भ्रष्ट तरीकों से अर्जित की गई हो सकती है। जांचकर्ताओं ने बताया कि सुचारिता के पास से मिली संपत्ति में से अधिकांश हिस्सा उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के नाम पर है।

सुचारिता का अतीत

सुचारिता को पहले मई में एक आधिकारिक अनुकूलता के लिए रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक व्यक्ति से रिश्वत मांगी थी जो एक आधिकारिक अनुकूलता की तलाश में था। सुचारिता को गिरफ्तार करने के बाद, उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इस mới जांच से पता चलता है कि सुचारिता का भ्रष्टाचार का एक लंबा इतिहास हो सकता है।

एसीबी की कार्रवाई

एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि वे सुचारिता के खिलाफ और जांच करेंगे और उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी पाए जाने पर सजा दिलाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि एसीबी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है और ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी जो भ्रष्टाचार में शामिल पाए जाते हैं।

निष्कर्ष

सुचारिता के मामले से पता चलता है कि भ्रष्टाचार अभी भी हमारे समाज में एक बड़ी समस्या है। एसीबी की जांच और कार्रवाई से उम्मीद है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो भ्रष्टाचार में शामिल हैं। यह मामला हमें यह भी याद दिलाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सभी की भागीदारी आवश्यक है और हमें अपने अधिकारियों से ईमानदारी और पारदर्शिता की अपेक्षा करनी चाहिए।


संपादक जम्पर मीडिया (Jumper Media).

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