'Reckless': CJI rejects reports of refusing hearing on police action against students

मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई से इनकार की खबरों को खारिज किया

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई से इनकार करने की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली कोई正式 याचिका दायर नहीं की गई थी। एक वकील ने अदालत के समक्ष एक पत्र प्रस्तुति का उल्लेख किया था। यह स्पष्टीकरण दो दिन बाद आया है जब एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मुद्दे का उल्लेख किया था और 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की थी।

पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई से इनकार की खबरें

पिछले दिनों मीडिया में खबरें आईं थीं कि मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह खबरें एक वकील द्वारा अदालत में एक पत्र प्रस्तुति के उल्लेख के बाद आईं थीं। वकील ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर तत्काल सुनवाई करे।

मुख्य न्यायाधीश का स्पष्टीकरण

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली कोई正式 याचिका दायर नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि एक वकील ने अदालत के समक्ष एक पत्र प्रस्तुति का उल्लेख किया था, लेकिन इसके अलावा कोई अन्य याचिका दायर नहीं की गई थी।

वकील की पत्र प्रस्तुति

वकील ने अदालत में एक पत्र प्रस्तुति का उल्लेख किया था, जिसमें उन्होंने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई की मांग की थी। वकील ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में तत्काल सुनवाई करे और छात्रों के अधिकारों की रक्षा करे।

मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि अदालत को किसी भी मामले में सुनवाई करने से पहले एक正式 याचिका दायर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत को किसी भी पत्र प्रस्तुति या अन्य दस्तावेजों पर आधारित नहीं किया जा सकता है।

निष्कर्ष

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के स्पष्टीकरण के बाद, यह स्पष्ट हो गया है कि पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई से इनकार की खबरें गलत थीं। अदालत को किसी भी मामले में सुनवाई करने से पहले एक正式 याचिका दायर होनी चाहिए। यह मामला एक बार फिर से अदालत में लाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए एक正式 याचिका दायर करनी होगी।


संपादक जम्पर मीडिया (Jumper Media).

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